Hame To Loot Liya Lyrics - Ismail Azad
Send Wishes with Message Magic in Your Language.This is song Hame To Loot Liya Lyrics. हमें तो लूट लिया मिलके हुस्न वालों ने song from the movie “Al Hilal” and singer Ismail Azad Qawwal, Chorus.
हमें तो लूट लिया
मिलके हुस्न वालों ने
काले-काले बालों ने,
गोरे गोरे गालों ने
नज़र में शोख़ियाँ और बचपना शरारत में
अदाएँ देख के हम फंस गए मोहब्बत में
हम अपनी जान से जाएँगे जिनकी उल्फ़त में
यक़ीन है के न आएँगे वो ही मय्यत में
ख़ुदा सवाल करेगा अगर क़यामत में
तो हम भी कह देंगे हम लुट गए शराफ़त में
वहीं वहीं पे क़यामत हो वो जिधर जाएँ
झुकी झुकी हुई नज़रों से काम कर जाएँ
तड़पता छोड़ दें रस्ते में और गुज़र जाएँ
सितम तो है ये कि दिल ले लें और मुकर जाएँ
समझ में कुछ नहीं आता कि हम किधर जाएँ
यही इरादा है ये कह के हम तो मर जाएँ
वफ़ा के नाम पे मारा है बेवफाओं ने
के दम भी हमको न लेने दिया जफ़ाओं ने
खुदा भुला दिया इन हुस्न के खुदाओं ने
मिटा के छोड़ दिया इश्क़ की खताओं ने
उड़ाया होश कभी ज़ुल्फ़ की हवाओं ने
हया ने नाज़ ने लूटा कभी अदाओं ने
हज़ारों लुट गए नज़रों के एक इशारे पर
हज़ारों बह गए तूफ़ान बन के धारे पर
न इन के वादों का कुछ ठीक है न बातों का
फ़साना होता है इनका हज़ार रातों का
बहोत हसीं है वैसे तो भोलपन इनका
भरा हुआ है मगर ज़हर से बदन इनका
ये जिसको काट ले पानी वो पी नहीं सकता
दवा तो क्या है दुआ से भी जे नहीं सकता
इन्हीं के मारे हुए हम भी हैं ज़माने में
हैं चार लफ्ज़ मोहब्बत के इस फ़साने में
ज़माना इनको समझता है नेक और मासूम
मगर ये कैसे हैं, क्या हैं, किसी को क्या मालूम
इन्हें न तीर न तलवार की ज़रुरत है
शिकार करने को काफी निगाह-ए-उल्फ़त है
हसीन चाल से दिल पायमाल करते हैं
नज़र से करते हैं बातें कमाल करते हैं
हर एक बात में मतलब हज़ार होते हैं
ते सीधे सादे बड़े होशियार होते हैं
खुदा बचाए हसीनों की तेज चालों से
पड़े किसी का भी पाला न हुस्नवालों से
हुस्न वालों में मोहब्बत की कमी होती है
चाहने वालों की तक़दीर बुरी होती है
उनकी बातों में बनावट ही बनावट देखी
शर्म आँखों में निग़ाहों में लगावट देखी
आग पहले तो मोहब्बत की लगा देते हैं
अपने रुख़सार का दीवाना बना देते हैं
दोस्ती कर के फिर अनजान नज़र आते हैं
सच तो ये है कि बेईमान नज़र आते हैं
मौत से कम नहीं दुनिया में मोहब्बत इनकी
ज़िन्दगी होती है बर्बाद बदौलत इनकी
दिन बहारों के गुजरते है मगर मर मर के
लूट गए हम तो हसीनों पे भरोसा कर के
हमें तो लूट लिया
मिलके हुस्न वालों ने
काले-काले बालों ने,
गोरे गोरे गालों ने
नज़र में शोख़ियाँ और बचपना शरारत में
अदाएँ देख के हम फंस गए मोहब्बत में
हम अपनी जान से जाएँगे जिनकी उल्फ़त में
यक़ीन है के न आएँगे वो ही मय्यत में
ख़ुदा सवाल करेगा अगर क़यामत में
तो हम भी कह देंगे हम लुट गए शराफ़त में
वहीं वहीं पे क़यामत हो वो जिधर जाएँ
झुकी झुकी हुई नज़रों से काम कर जाएँ
तड़पता छोड़ दें रस्ते में और गुज़र जाएँ
सितम तो है ये कि दिल ले लें और मुकर जाएँ
समझ में कुछ नहीं आता कि हम किधर जाएँ
यही इरादा है ये कह के हम तो मर जाएँ
वफ़ा के नाम पे मारा है बेवफाओं ने
के दम भी हमको न लेने दिया जफ़ाओं ने
खुदा भुला दिया इन हुस्न के खुदाओं ने
मिटा के छोड़ दिया इश्क़ की खताओं ने
उड़ाया होश कभी ज़ुल्फ़ की हवाओं ने
हया ने नाज़ ने लूटा कभी अदाओं ने
हज़ारों लुट गए नज़रों के एक इशारे पर
हज़ारों बह गए तूफ़ान बन के धारे पर
न इन के वादों का कुछ ठीक है न बातों का
फ़साना होता है इनका हज़ार रातों का
बहोत हसीं है वैसे तो भोलपन इनका
भरा हुआ है मगर ज़हर से बदन इनका
ये जिसको काट ले पानी वो पी नहीं सकता
दवा तो क्या है दुआ से भी जे नहीं सकता
इन्हीं के मारे हुए हम भी हैं ज़माने में
हैं चार लफ्ज़ मोहब्बत के इस फ़साने में
ज़माना इनको समझता है नेक और मासूम
मगर ये कैसे हैं, क्या हैं, किसी को क्या मालूम
इन्हें न तीर न तलवार की ज़रुरत है
शिकार करने को काफी निगाह-ए-उल्फ़त है
हसीन चाल से दिल पायमाल करते हैं
नज़र से करते हैं बातें कमाल करते हैं
हर एक बात में मतलब हज़ार होते हैं
ते सीधे सादे बड़े होशियार होते हैं
खुदा बचाए हसीनों की तेज चालों से
पड़े किसी का भी पाला न हुस्नवालों से
हुस्न वालों में मोहब्बत की कमी होती है
चाहने वालों की तक़दीर बुरी होती है
उनकी बातों में बनावट ही बनावट देखी
शर्म आँखों में निग़ाहों में लगावट देखी
आग पहले तो मोहब्बत की लगा देते हैं
अपने रुख़सार का दीवाना बना देते हैं
दोस्ती कर के फिर अनजान नज़र आते हैं
सच तो ये है कि बेईमान नज़र आते हैं
मौत से कम नहीं दुनिया में मोहब्बत इनकी
ज़िन्दगी होती है बर्बाद बदौलत इनकी
दिन बहारों के गुजरते है मगर मर मर के
लूट गए हम तो हसीनों पे भरोसा कर के
Song Information
| Song Title | Hame To Loot Liya |
| Artist | Ismail Azad |
| Lyricist | Shewan Rizvi |
| Composer | Bulo C. Rani |
| Year | 1958 | More Info | Wikipedia | Find Songs | Home |
Hame To Loot Liya Lyrics Meaning
The song Hame To Loot Liya Lyrics is one of the most famous and enduring Qawwalis in the history of Indian cinema from the 1958 film Al Hilal. Performed with high energy and traditional fervor by Ismail Azad and his troupe the song describes the feeling of being completely mesmerized and robbed of ones peace by a beautiful beloved. In Hame To Loot Liya Lyrics the narrative focuses on the power of a single glance and the captivating charm of the person who has stolen the singers heart. The rhythmic clapping and the driving beat of the harmonium create a celebratory and spiritual atmosphere that has made the song a staple for decades. The lyrics by Shewan Rizvi are poetic and catchy making it a favorite for stage performances and social gatherings. Even today Hame To Loot Liya Lyrics remains a benchmark for cinematic Qawwalis representing the era when music was a communal celebration of love and life and the beauty of human connection in its most raw form.
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